रामपुर (पंजाब दैनिक न्यूज़) भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के आह्वान पर रामपुर, नीरथ, बायल, झाकरी और नाथपा सहित कई क्षेत्रों में “राष्ट्रीय मांग दिवस” व्यापक और संघर्षपूर्ण तरीके से मनाया गया। इस दौरान ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन, धरना, गेट मीटिंग आयोजित कीं और श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम में शामिल सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, राहुल विद्यार्थी, दिनेश मेहता और अन्य नेताओं ने कहा कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। देशभर में आयोजित विरोध कार्यक्रमों में “चारों श्रम संहिताएँ वापस लो”, “न्यूनतम वेतन ₹26,000 लागू करो” और “ठेका प्रथा खत्म करो” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा 8 मई 2026 को श्रम संहिताओं के नियम लागू करना मजदूरों की अनदेखी करते हुए कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों से स्थायी रोजगार कमजोर होगा, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और मजदूरों के यूनियन बनाने व हड़ताल करने के अधिकार सीमित हो जाएंगे।प्रदर्शन के दौरान मजदूरों पर हो रहे कथित दमन, झूठे मुकदमों और गिरफ्तारियों के खिलाफ भी आवाज उठाई गई। नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए मजदूरों, किसानों और युवाओं से एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि श्रम संहिताओं को तुरंत वापस लिया जाए, न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रतिमाह लागू किया जाए, ठेका प्रथा समाप्त की जाए और सभी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा व सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जाएं।यह “राष्ट्रीय मांग दिवस” मजदूर वर्ग की बढ़ती एकजुटता और संघर्षशीलता का प्रतीक बनकर सामने आया, जिसमें स्पष्ट संदेश दिया गया कि मजदूर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी