(पंजाब दैनिक न्यूज़) पंजाब में कांग्रेस द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे का ऐलान करने के पहले, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कड़े तेवर अपना लिए हैं. सिद्धू ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ सब इकट्ठे हो गए हैं.चोर-डाकू-लुटेरे सब अपना धंधा बचाने के लिए खड़े हो गए हैं. उनको पता है कि अगर इस बार सिद्धू को निर्णय लेने की ताकत मिली तो या तो सिद्धू रहेगा या माफिया रहेगा. विक्रम सिंह मजीठिया को ध्यान भटकाने के लिए भेजा गया है. उनकी यही राजनीति रही है. उन्होंने कहा, ‘पंजाब इस समय कर्ज में डूबा हुआ है और इसका समाधान है कि माफिया का अंत किया जाए, उससे पैसा निकाला जाए. अगर मजीठिया को नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ ही लड़ना था तो मजीठा छोड़कर आता, वहां तो अपनी घरवाली को स्थापित करके आया है. अगर मजीठिया में दम है तो अपनी घरवाली की जगह किसी कार्यकर्ता को सीट देता. मजीठिया की क्वालिफिकेशन यह है कि वह सुखबीर का साला है. ‘अपनी उपलब्धियों के बारे में किए गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘ मैंने करतारपुर का कॉरिडोर खुलवाया यह मेरी अचीवमेंट है. दूसरी ओर, मजीठिया की अचीवमेंट यह है कि उसने 20 से 30 हज़ार लोगों पर केस डलवाए.’ मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल सिद्धू ने कहा कि हम अगली पीढ़ी के लिए यह चुनाव लड़ना चाहते हैं, ये आल इन वन माफ़िया. ये लड़ाई हराम बनाम ईमान की है. मजीठिया की वजह से अकाली दल अब खाली दल हो गया है. सिद्धू से जब पूछा गया कि क्या खुद को CM कैंडिडेट के तौर पर देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा, ‘आपका काम आपका किरदार आपकी नैतिकता और आपकी 17 साल का इतिहास यह लोग बताएंगे कि वह किस रूप में नवजोत सिंह सिद्धू को देखते हैं. मैं सत्ता छोड़कर लड़ाई लड़ रहा था तब यह मजीठिया और केजरीवाल कहां थे. केजरीवाल ने इसी तस्कर से माफी मांगी तो उसके लिए ड्रग्स मुद्दा नहीं है जबकि ड्रग्स घर-घर का मसला है. जब तक आप एक रोडमैप, एक एजेंडे के साथ एक पॉलिसी ड्रिवन रोड मैप से नहीं जाएंगे रिसर्च ड्रिवन रोड मैप से नहीं जाएंगे, तो लोगों को बताएं कि इस कीचड़ से उनको निकालेगा कौन और कैसे?
मुख्यमंत्री चेहरे का मुद्दा इतना बड़ा क्यों बन गया? इस सवाल पर सिद्धू ने कहा कि वह इसलिए कि नीतियां लागू कौन करेगा? अगर यह नीतियां हैं तो इन नीतियों को लागू कौन करेगा, ये सबसे बड़ा सवाल है. अगर कोई खुद चोर हैं, माफिया का हिस्सा है अगर कोई खुद डिस्टलरी लगाता है कोई खुद केबल का हिस्सेदार है तो वह कैसे इसको लागू करेगा? यह कैंसर किसी सेरिडॉन की गोली लेने से खत्म होने वाला नहीं है. आप को सख्त निर्णय लेने होंगे, और बस सख्त निर्णय लेने के लिए ऊपर ईमानदार इंसान चाहिए. परसों कांग्रेस अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने वाली है, जब इस बारे में सवाल पूछा गया कि सिद्धू ने जवाब में सवाल दागा- क्या उन्होंने आपको बताया है? उन्होंने कहा कि मुझे बताया नहीं है. अगर आपको उन्होंने बताया है तो आप मुझसे बड़े उस्ताद हैं गुरु. हमने खुद राहुलजी को बोला है, सबने मिलकर बोला है कि हमने आम आदमी पार्टी को इसी बात पर ठोका कि बारात तुम्हारे घर के बाहर खड़ी है, तुम्हारा दूल्हा कहां है? तो अगर आज वह हमको पलट कर कहते हैं कि तुम्हारा दूल्हा कहां है? लेकिन एक बात पक्की है कि पंजाब के लोग ‘दूध का जला लस्सी भी फूंक-फूंक कर पीता है, इस बार लोग ठगे हुए महसूस कर रहे हैं. आपने अगर ईमानदार बंदा, नैतिकता से भरा हुआ बंदा नहीं दिया तो विकल्प है उनके पास और चाहे वह झूठा ही हो चाहे वह यह वाला हो कि इनको भी देख लिया उनको भी देख लिया, अब इसको देखेंगे.इस सवाल पर कि जो भी मुख्यमंत्री उम्मीदवार होगा आप उसको स्वीकार करेंगे, नवजोत ने चतुराईभरा जवाब दिया, ‘मेरे स्वीकार करने या ना स्वीकार करने की बात ही नहीं है. सवाल यह है कि क्या लोग स्वीकार करेंगे?याद रखिएगा कि जो आपका लीडर होगा वोट उसको पड़ेंगे तो क्या 60 MLA बना लेंगे? बिना विधायकों के कोई मुख्यमंत्री कैसे बनेगा? विधायक बने नहीं और मुख्यमंत्री बना देना है यह कैसे होगा?’ उन्होंने कहा, ‘किसी के बाप का राज नहीं है यह लोगों का राज है. सवाल यही है कि पंजाब के लोग क्या चाहते हैं, उनकी क्या मंशा है? इसको आदर और सम्मान देना होगा क्योंकि अगर आपने किसी नैतिकता से परे बंदे किसी मोरल अथॉरिटी से परे बंदे और किसी बेईमान को और माफिया के हिस्सेदार को बनाया तो मैं आपको लिख कर देता हूं कि लोग बदलाव ढूंढ रहे हैं. बदल देंगे मूली की तरह काट भी देंगे.इस सवाल पर कि साफ-साफ बताइए ईमानदार कौन है और विकल्प कौन है, सिद्धू ने कहा, ‘ इसको तय करने वाला मैं कौन होता हूं यह तो अहंकार होगा इसे तय करने वाली पंजाब की जनता है .आवाज-ए-खलक नगाड़ा-ए-खुदा…जनता की आवाज में परमात्मा की आवाज है. मैं यह कह सकता हूं कि मैंने दुनिया का ठेका नहीं लिया लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू चवन्नी रवादार नहीं है और 17 साल से उसका किरदार बोलता है उसको बोलने की जरूरत नहीं है.’
