जालंधर पंजाब दैनिक न्यूज़ (लवदीप/ अनिल )पंजाब के लोगों को इस बात पर गर्व रहेगा कि अपना रजत जयंती समारोह मना रहे हिंदी सांस्कृतिक मंच संस्था पंजाब कला साहित्य अकादमी का गठन एवं संचालन पंजाब की धरती पर हुआ था। पंकस अकादमी द्वारा साहित्य, कला, समाज, शिक्षा आदि के क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त लोगों को सम्मानित करने की परंपरा पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का ही हिस्सा है। यह कहना था विधायक राजेंद्र बेरी का, जो पंकस अकादमी के 25 वें वार्षिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह के दौरान मंच पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पंकस अकादमी के अध्यक्ष सिमर सदोष ने जो परंपरा कायम की है वह उसके साथ है और आजीवन साथ ही चलते रहेंगे। विशेष अतिथि के रुप में पहुंचे पंजाब के पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा कि पंकज अकादमी पंजाबी कवि सभा की ही अगली कड़ी है। अपने समय में पंजाब के बहुत बड़े शायर सरदार संतोख सिंह सफरी ने पंजाब के माथे पर जो तिलक सजाया था, पंकस अकादमी के अध्यक्ष व सरदार संतोख सिंह सफरी के सुपुत्र सिमर सदोष उसी परंपरा को आगे चला रहे हैं।हिमाचल प्रदेश के पूरे बागवानी मंत्री ठाकुर सत्य प्रकाश ने कहा कि वह पिछले 20 सालों से पंकज अकादमी के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंकस अकादमी ने सभी राज्य और विदेशों में बैठे साहित्यकारों के बीच पुल बनाने का काम किया है। अकादमी के निदेशक डॉक्टर जगदीप सिंह ने कहा कि इस वर्ष का रजत जयंती समारोह अपने समय की बहुपक्षीय शख्सियत, शिक्षाविद, खिलाड़ी, संत पुरुष प्रोफेसर संत सिंह जी की पावन स्मृतियों को समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उनके नाम पर मानव सेवा रतन सम्मान की परंपरा शुरू की गई है, जो आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी। वहीं वरिष्ठ संपादक व पंजाबी विरसा, विरासत का झंडा बुलंद करने वाले सतनाम सिंह मानक ने कहा कि यह बड़ी अच्छी बात है कि पंजाब की धरती से उठी हिंदी साहित्यिक संस्था पंकस अकादमी ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश सेठ ने कहा कि वह 25 वर्ष से इस संस्था के साथ जुड़े हुए हैं। उनका कहना था कि वह संस्था के अध्यक्ष सिमर सदोष के संघर्ष के साक्षी हैं।






